कहानी लेखन


कहानी लिखना एक रचनात्मक कृतित्व है। इस कृतित्व के लिए अचूक वर्तनी का प्रयोग एवं भाषा का अभ्यास आवश्यक होता है। इसके बाद ही कहानी के अंगों से परिचित होकर एक सुंदर कहानी की रचना की जा सकती है। 

कहानी के अंग- 

कहानी लेखन के निम्नलिखित ६ अंग हैं-

  • घटना 

मूलतः कोई भी कहानी घटनाओं की श्रृंखलाओं से निर्मित होता है। घटना को मूलतः तीन बिंदुओं में विभाजित किया जा सकता है। आरंभ मध्य और अंत। प्रारंभिक घटनाएं अपनी मध्य तक आते-आते समस्याओं के उच्चतम शिखर तक बढ़ जाता है। इसके बाद मध्य से अंत तक समस्याओं का ढलान शुरू होता है और अंत में समस्याओं पर नायक का विजय यही कहानी लेखन की शास्त्रीय पद्धति है। आधुनिक काल में कहानी लेखन को लेकर नए प्रयोग भी सामने आए हैं। भारतीय शैली में कहानी सदैव सुखांत प्रधान होती हैं। किंतु अब पाश्चात्य प्रभाव से बहुत सी कहानियां दुखांत प्रधान भी परिलक्षित हो रही हैं। दुखांत कहानियों में घटनाओं का क्रम आरंभ से मध्य के शिखर तक चढ़ते चढ़ते अंत हो जाता है। जहां समस्या का कोई समाधान नहीं होता...

  • चरित्र/ पात्र 

कहानी के हर घटना में पात्र या पात्रों का समूह होता ही है। कहानी में प्रयुक्त पात्रों का यदि वर्गीकरण किया जाए तो मुख्य रूप से दो प्रकार के पात्र दिखाई देते हैं। पहला सजीव पात्र दूसरा निर्जीव पात्र। सजीव पात्रों में मनुष्य प्राणी या वनस्पतियों का वर्णन होता है, वहीं दूसरी तरफ निर्जीव पात्र में साधन सामग्री या वस्तु या वास्तुओं का वर्णन मिल जाता है। कहानी में वर्णित पात्र और उनके चरित्र अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। स्थिति के आधार पर पात्रों का वर्गीकरण पहले सजीव और निर्जीव रूप में दिखाई देता हो किंतु चरित्र के आधार पर पात्र का वर्गीकरण नायक और खलनायक के रूप में भी दिखाई देता है। उक्त कथित दो चरित्रों के अलावा भी सहपात्र भी होते हैं जो नायक अथवा खलनायक के सहायक की भूमिका में दिखाई देते हैं।  

  • देश, काल-वातावरण 

कहानी का तीसरा महत्वपूर्ण अंग है देश काल और वातावरण। कोई घटना किसी न किसी पार्श्वभूमि में घटित होती है और कुछ घटना का अपना एक निश्चित वातावरण होता है। कहानी में यह वातावरण निर्मित करना कथा के विश्वसनीयता के लिए आवश्यक होता है। वातावरण के वर्णन के लिए स्थान, समय, ऋतु, हवामान आदि का बखान किया जाता है। अक्सर समस्या का मूल कहानी का यही अंग विस्तृत करता है।

  • संवाद 

किसी कहानी का चौथा सबसे महत्वपूर्ण अंग उसका संवाद है। संवाद कहानी प्रवाह उत्पन्न करता है। इसके अतिरिक्त विभिन्न तरह की भावना एवं वैचारिकताओं को उत्तेजित करने एवं उत्पन्न करने का कार्य भी यह संवाद ही करता है। संवाद से कहानी में रोचकता एवं रस का सृजन होने लगता है। बिना संवाद के कहानी मात्र सूचनाओं का ढेर दिखाई देता है। कहानी में सरसता का मूल स्रोत ही संवाद है इसलिए विभिन्न मनोदशा एवं अनुभव से यक्त संवाद का होना कहानी में अनिवार्य है। कथा में वर्णित संवाद को दोहरे उद्धरण चिन्ह में रखा जाता है।

जैसे- राम ने सीता से कहा, "प्रिये, यह स्वर्ण मृग कोई आसुरी माया प्रतीत होती है क्योंकि आज तक ऐसा मृग इतिहास में कहीं वर्णित नहीं है तथापि आज तक तुमने इतने आग्रह से कुछ माँगा नहीं, इसलिए मैं इसे पकड़ने इसके पीछे जा रहा हूं। लक्ष्मण हो न हो यह कोई छल हो, इसलिए तुम सावधान रहना, और जब तक मैं न लौटूँ इस आश्रम सहित सीता की सुरक्षा का ध्यान रखना।"

  • उद्देश्य;

किसी कहानी का पांचवा महत्वपूर्ण अंग उसका उद्देश्य है। कोई कहानी बिना उद्देश्य के नहीं होती। कहानी का यह अंग ही कहानी का आधार होता है। कहानियां किसी शिक्षा के लिए उद्धरण के लिए मनोरंजन के लिए तथा भावनाओं के विरेचन के लिए कहां लिखा जाता है। कहानी के माध्यम से शिक्षा सुगम एवं आसान हो जाता है। किसी जटिल ज्ञान को सुगमता पूर्वक लोगों में प्रसारित करने का सहज माध्यम कहानी है। कहानी के साथ उसका मूल उद्देश्य जान लेना अत्यंत आवश्यक होता है। कथा का उद्देश्य जानना, किसी कहानी का चरम लक्ष्य होता है। पुराणों में ऐसे अनेक कथा प्रसंग है जहां कथा पढ़ाया सुना तो जाता है किंतु उसका उद्देश्य नहीं मिलता। ऐसे में वह कथा अविश्वसनीय चमत्कारी अद्भुत जान पड़ता है। ऐसी कथाओं का बोध होते ही उनमें से अद्भुत और चमत्कार का लोप होने लगता है। एवं कथा का उद्देश्य स्पष्ट बोधगम्य ज्ञानपरक हो जाता है। किसी चेतना के लिए कथा बोध एवं ज्ञान का सेतु है।

  • भाषाशैली 

कहानी लेखन का एक महत्वपूर्ण अंग है उसकी भाषा शैली है। भाषा शैली चरित्र के वैविध्य के अनुरूप भी प्रयुक्त की जाती है। कथा लिखने वाले या कहने वाले की शैली तथा कथा में प्रयुक्त चरित्रों के बात करने की शैली में किंचित भिन्नता कथा को रोचक बनाती है। 

एक माहिर लेखक अपनी कथा के चरित्र में रम कर उसके अनुरूप संवाद उत्पन्न करता है। यही वह बारीकी है जिससे कथा यथार्थ लगने लगती है। यही कारण है कि कहानी में भाषा शैली की वैविध्यता का प्रयोग अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।

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