Saturday, 4 March 2023

कीर्ति

कीर्ति

तुम जो स्वेद से भींगे, 

चिढ़ चिढ़े सूरज की तीखी धूप में 

अपना लक्ष्य खोज रहे हो, 

नहीं जानते कि 

इसी मार्ग में 

आगे बहुत आगे 

सैकड़ों भुजाओं वाला 

एक रसीला नौजवान बरगद, 

हरे पत्तों के हँसी की, 

शीतल छाया लिए 

तुम्हारे आगमन की 

प्रतीक्षा में तप रहा है। 

मैंने देखा है, 

उसी शीतल छाया में 

अपनी दृष्टि की 

दिव्य सुगंधित फूल बिछाए, 

वह अत्यंत सुंदरी, 

तुम्हारी 

परम प्रियतम् 'कीर्ति', 

बेचैन है कि कब तुम्हारा आगमन हो 

और 

कब वह अपनी सुकोमल 

भुजाओं की आलिंगन में बांध कर 

स्वयम् मुक्त हो जाये। 

वह तुमपर न्योछावर होने को आतुर है, 

वह तुममें लीन होना चाहती है। 

इस अहिल्या की जड़ता में 

देखो राम ! 

तुम्हारी कीर्ति मुक्ति को कितना आतुर है? 

तुम पहुंचोगे न वहां तक?  

उसे अपनी ध्वजा बनाने?


Friday, 3 March 2023

हार्दिक बधाई

Shveta
जन्म दिन की बधाई

Wednesday, 1 March 2023

हार्दिक शुभकामनाएं


नायगांव म.न.पा. सेकेंडरी स्कूल के कक्षा दसवीं के समस्त विद्यार्थियों को जो बोर्ड की परीक्षा के अभियान में लगे हैं, सफ़लता की शुभकामनाएं।







"देहु शिवा वर मोहि इहे"- महेंद्र कपूर 

Tuesday, 28 February 2023

मा.आमदार विधायक नरेंद्र पवार एवं हजारों गणमान्यों की उपस्थिति में निकिता सिंह एवं वीर प्रताप सिंह परिणय सूत्र में बंधे:

मा.आमदार विधायक नरेंद्र पवार एवं हजारों गणमान्यों की उपस्थिति में निकिता सिंह एवं वीर प्रताप सिंह परिणय सूत्र में बंधे।

मुंबई:शिक्षा क्षेत्र में विगत तीन दशकों से कार्यरत समाजसेवी अशोक सिंह एवं कुसुमलता अशोक सिंह की सुपुत्री निकिता सिंह का पाणिग्रहण संस्कार श्रीमती प्रभावती सिंह एवं स्मृति शेष सीताराम सिंह के सुपौत्र सुरेंद्र प्रताप सिंह एवं तारा देवी के सुपुत्र वीरप्रताप सिंह से रेड चिल्ली मैरिज हॉल कल्याण -मुरबाड रोड,ता.कल्याण , जिला -ठाणे में बड़े ही शानदार ढंग से संपन्न हुआ।

मा.आमदार विधायक नरेंद्र पवार एवं हजारों गणमान्यों की उपस्थिति में निकिता सिंह एवं वीर प्रताप सिंह परिणय सूत्र में बंधे।


इस अवसर पर अशोक सिंह की ओर से बारातियों का स्वागत करने हेतु राम आश्रय सिंह, महेंद्र सिंह,राजेंद्र सिंह, जनार्दन सिंह, आलोक सिंह,जियाराम सिंह, धर्मेंद्र सिंह, सत्येंद्र सिंह, अवनेंद्र सिंह, शशांक सिंह, शुभम सिंह, आदर्श सिंह, हर्ष सिंह,विहान सिंह, देवांशी सिंह, उत्कर्ष सिंह के साथ ही उनके सबसे करीबी पारिवारिक मित्रों एवं संगे संबंधियों ने बारातियों का बड़े ही आदर पूर्वक स्वागत किया। वहीं वर पक्ष के महेंद्र प्रताप सिंह (एम .पी.सिंह), सुरेंद्र प्रताप सिंह, लोकप्रिय समाजसेवी शिक्षाविद् एवं भाजपा के आधार स्तंभ राणा प्रताप सिंह, विजय प्रताप सिंह,राज प्रताप सिंह,विपिन कुमार सिंह ने वधु पक्ष का गले मिलकर एक दूसरे का अभिवादन स्वीकार किया। गौरतलब ‌हो कि इस अवसर पर पूर्व विधायक नरेंद्र पवार, समाजसेवी शिक्षाविद् चंद्रवीर बंशीधर यादव,प्रशांत रामचंद्र पाण्डेय, समाजसेवी उद्योगपति अरविंद सिंह,ए.के.सिंह, घाटकोपर हिंदी हाईस्कूल के वाईस प्रिंसिपल राजेन्द्र प्रसाद सिंह, पर्यवेक्षक अभय प्रताप सिंह, उद्योगपति नरसिंह यादव, प्रधानाचार्य उमाशंकर सिंह, पूर्व प्रधानाचार्य जनार्दन सिंह, अनूप मिश्रा सहित हजारों गणमान्यों की गरिमामय उपस्थिति से सर्वत्र खुशी का वातावरण था। सभी ने नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद दिया।

कुलवंत कौर कांकर की सेवानिवृत्ति पर भव्य समारोह संपन्न:



कुलवंत कौर कांकर की सेवानिवृत्ति पर भव्य समारोह संपन्न:

मुंबई: न्यू सायन मनपा माध्यमिक विद्यालय की अनुशासन प्रिय , कर्तव्य निष्ठ , विद्यार्थियों में लोकप्रिय वरिष्ठ शिक्षिका कुलवंत कौर कांकर की सेवानिवृत्ति का समारोह बड़े ही आनंद पूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।इस अवसर पर उनके पुत्र गगन, पुत्री प्रीति सिंह, पुत्रवधू निहारिका की गरिमामय उपस्थिति रही।इस अवसर पर विभाग निरीक्षक शोभा जामघरे, प्रिंसिपल विलास घेरडे, प्रिंसिपल विकास पाटिल, प्रिंसिपल मारूति शेरकर,इंदू सिंह,स्नेहल कासुर्डे, प्राथमिक विभाग की प्रभारी मुख्याध्यापिका शारदा पोल, वरिष्ठ शिक्षिका प्रतिभा राऊत, सुवर्णा नागले, माध्यमिक विभाग के हिंदी माध्यम की प्रमुख प्रतिमा सुभाष यादव, सरिता ननवरे, शंकर भोसले,माधुरी प्रमोद मिश्रा,पवन पटेल, मोहिनी चौरसिया, मंजू गुप्ता, सीमा यादव,उमा तिवारी, श्रीकांत यादव, राजेश रहांगडाले, वरिष्ठ शिक्षिका मीना विश्वे, मोतीराम बागुल, ज्योत्स्ना दाते, निवेदिता पवार,निता रेचवाडे, महापौर पुरस्कार प्राप्त आदर्श शिक्षिका श्रृति राणे, संदीप सिंह, संतोष पटेल, राकेश सुदर्शन पाठक, लक्ष्मी बिड़लान आदि ने श्रीमती कौर एवं उनके संपूर्ण परिवार का सत्कार पुष्प गुच्छ,शाल, श्रीफल, पुष्प गुच्छ और भेंट वस्तु देकर किया। समारोह में शामिल सभी लोगों ने लज़ीज़ व्यंजन का स्वाद ग्रहण किया। गौरतलब हो कि समारोह में सत्कार मूर्ति के विषय में बोलते समय आदर्श शिक्षक शंकर गंगाराम भोसले एवं माधुरी मिश्रा भावुक हो गईं। वास्तव में श्रीमती कुलवंत मैडम संपूर्ण विद्यालय में एक अभिभावक के रूप में कार्य करते रहीं। यही वजह है कि कल अर्थात एक मार्च से मैडम की अनुपस्थिति सभी को खलेगी।


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Sunday, 26 February 2023

वचन की महिमा

https://antarabhivyakti-yogesh.blogspot.com/2023/02/blog-post_26.html

एक पहाड़ी जंगल के नीचे विजयगढ़ नाम का एक गांव था। गांव के सारे जानवर हरी घास खाने के लिए प्रभात होते ही उसी पहाड़ी के ऊपर बसे जंगल में चले जाते और शाम होते-होते घर वापस आ जाते थे।

हर दिन की तरह लक्ष्मी नाम की एक गाय अन्य गायों के साथ उसी पहाड़ी के जंगल में घास खाने के लिए गई। वह हरी घास खाने में इतनी अधिक तन्न्मय थी कि वह कब एक सिंह की कंदरा के पास पहुंच गई, उसे पता भी न चला।

शेर अपनी कंदरा में सो रहा था और वह पिछले दो तीन दिनों से भूखा भी था। जैसे ही लक्ष्मी उस भूखे सिंह के निकट पहुँची, गाय की सुंदर गंध से सिंह की निद्रा टूट गई।

वह धीरे-धीरे खोह से बाहर आया और गाय देखकर प्रसन्न हो गया। उसने मन ही मन सोचा कि आज उसकी कई दिनों की भूख मिट जाएगी। वह आज इस हृष्टपुष्ट गाय की स्वादिष्ट मांस खाएगा ऐसा  सोचते हुए उसने एक भयानक गर्जना की।

लक्ष्मी उसकी दहाड़ सुनकर सिहर गई। जब वह अपना सिर उठाकर अपने आस-पास देखी, तो वहां दूर-दूर तक उसका अपना कोई भी नहीं दिखा।

अब वह हिम्मत करके पीछे मुड़ी, तो उसे सामने अपना विकराल तीक्ष्ण दाँत दिखाकर गुर्राता हुआ सिंह खड़ा दिखाई दिया। उसने लक्ष्मी से कहा, “मुझे कई दिनों से कोई शिकार नहीं मिल रहा था, मैं भूखा हूँ। संभवतः इसलिए भगवान ने मेरा पेट भरने के लिए तुझे मेरे यहां पर भेजा है। आज मैं तुझे खाकर अपनी क्षुधा तृप्त कर लूंगा।”

उस भूखे सिंह की बात सुनकर लक्ष्मी कंपित स्वर में बोली “ है वनराज, मुझे जाने दो, मुझे मत खाओ। मेरा एक छोटा बच्चा है, जो अभी केवल मेरा ही दूध पीता है, उसे घास खाना अब तक नहीं आया है।”

लक्ष्मी की बात सुनकर वह अट्टहास करते हुए बोला, “तो क्या मैं अपने हाथ में आया अपना आहार ऐसे ही जाने दूं? मैं तो आज तुझे खाकर अपनी कई दिनों की भूख मिटाऊंगा।”

शेर के ऐसा कहने पर लक्ष्मी उसके सामने रोने लगी और विनती करते हुए बोली, “ है सर्वशक्तिमान, है कृपा निधान मुझे अपने प्राणों की चिंता नहीं है। मैं अपने बछड़े के लिए चिंतित हूँ । यदि आज मैं अपने झुंड़ के साथ घर नहीं गयी तो संभवतः मेरे शोक में मेरा बछड़ा भी अपना जान दे देगा। एक भूखे प्राणी का जितना अधिकार उसके भोजन पर होता है उतना ही एक नवजात शिशु का अधिकार अपने जीवन के लिए उसकी मां पर होता है।अतः मुझे जाने दो। मैं वचन देती हूँ आज अपने बछड़े को आखिरी बार दूध पिला कर उसे खूब दुलार कर, उसकी अनुमति लेकर कल सुबह होते ही तुम्हारे पास आ जाऊंगी। फिर तुम मुझे खा लेना और अपनी भूख मिटा लेना।” 


"और यदि तुम्हारे बछड़े ने अनुमति न दी तो?" सिंह ने गरज कर पूछा।

"अगर मगर की तो बात ही नहीं है वनराज, जैसे मैं अपनें दायित्व से बँधी होने के नाते आपसे एक रात की अनुमति मांग रही हूं ऐसे ही मैं कल प्रस्तुत हो जाने को वचन बद्ध हूँ। अतः हे दयालु आप संशय न करें।" लक्ष्मी ने आर्द्र स्वर में गुहार लगाई।

अंततोगत्वा सिंह लक्ष्मी की बात मान लिया और धमकी देते हुए बोला, “अगर कल तू नहीं आई, तो मैं तेरे गांव आऊंगा, फिर तुझे तेरे बेटे सहित खा जाऊंगा।”

लक्ष्मी सिंह को धन्यवाद देती हुई वहां से उदास अपनें घर की ओर चली। रास्ते में उसकी प्रिय सखियों ने उदासी का कारण जानना चाहा, पर उसने किसी को कुछ न बताया। वहां से वह सीधे अपने बछड़े के पास गयी। उसे खूब दूध पिलायी, और देर रात तक प्यार करती रही। फिर बछड़े को जंगल में  हुई सारी घटना बताते हुए बोली कि, मेरे बेटे, अब से तुम्हें अपना ध्यान स्वयं ही रखना होगा। मैं कल सुबह होते ही अपना वचन पूरा करने के लिए शेर के पास चली जाऊंगी।"

अपनी मां की बातें सुनकर बछड़ा रोने लगा,"बोला, मां मैं तुम्हारे बिना एक क्षण भी नहीं जी सकता। कल तुम जहां जाओ मुझे भी साथ ले चलना। हम जीयेंगे या साथ या मरेंगे।" 

लक्ष्मी ने कहा,"नहीं बेटा ऐसा अशुभ नहीं कहते। चलो अब चुपचाप सो जाओ। मेरे वचन के पैर में अपनें मोह की बेड़ी न डालो।"

लक्ष्मी को नहीं पता था कि उसकी यह बातें उसकी प्रिय सहेलियां सुन रहीं थीं। एक तो बहुत बूढ़ी भी हो चुकी थी, उसने मन में सोचा, कल मैं स्वयं वनराज के सामने इससे पहले चली जाऊंगी और विनती करुंगी कि लक्ष्मी के बदलें वह मुझे ही का ले।

किन्तु जो होना होता है वही होकर रहता है। दूसरे दिन सुबह होते ही लक्ष्मी जंगल की तरफ निकल गयी और उस कंदरा के समीप पहुंचकर सिंह से बोली, “अपने वचन के अनुसार मैं तुम्हारे पास आ गई हूँ। अब तुम मुझे खा सकते हो।”

सिंह अट्टहास करता हुआ बोला,"मैं किस किस को खाऊँ समझ नहीं पा रहा हूं। देखो, तुम्हारी हितेषी सभी सहेलियां हठ कर रहीं हैं कि मैं उन्हें खा लूं, तेरा बेटा भी यहां आया हुआ है वह कहता है कि मैं किसी को नहीं केवल उसे ही खाऊँ। उसका मांस बहुत स्वादिष्ट और नर्म है। तुम कहती हो कि मैं अपना वचन निभाने आ गयी। तुम लोगों का आपसी प्रेम देखकर मेरा भूख मिट गया है। मेरा मन आनंद से भरा जा रहा है। सच मुच गाय धरती पर ममता की महान मूरत है।" यह कहते कहते वह सिंह एक दिव्य रुप में परिवर्तित होने लगा। अब वहां एक मेघ वर्ण का चतुर्भुजी अलौकिक देह प्रत्यक्ष हुआ जिसने पीले परिधान धारण किए थे, जिनके एक हाथ में सुदर्शन चक्र था, एक में कौमुदी गदा, एक में शंख तथा एक हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में उठा था। उन्होंने गंभीर गदगद स्वर में कहा, “मैं तो बस तुम्हारी परीक्षा ले रहा था लक्ष्मी। तुम अपने वचन की पक्की हो। मैं इससे बहुत प्रसन्न हूँ। तुम अब अपने बछड़े के साथ घर  वापस चली जाओ। मैं तुम्हें वरदान देता हूं कि जब तक यह जगह है तब तक तुम इस समूची सृष्टि की माता कहलाती रहोगी”


उसी दिन के बाद से लोग सभी गायों को गौ माता कहने लगे।