Saturday, 28 January 2023

मराठी भाषा संवर्धन दिवस निमित्त निबंध प्रतियोगिता..

नायगांव माध्यमिक विद्यालय: 

 28/01/2023, ना. मा. वि. दा. मुंबई, प्रतिनिधि,

आज 28 जनवरी को नायगांव माध्यमिक विद्यालय में हिंदी और मराठी माध्यम के कक्षा ९वीं अ, ब, तथा क वर्ग के विद्यार्थियों ने अंतर्विद्यालयीन मराठी निबंध प्रतियोगिता में सोत्साह हिस्सा लिया। इस प्रतिभागिता में हिस्सा लेते विद्यार्थियों में कर्म प्रधानता की भावना ही प्रबल रही। विजय पराजय या स्थान विशेष प्राप्त करने की भावना से ऊपर केवल प्रतिभागी होने भर के साक्षी भाव को अपना अहोभाग्य स्वीकार कर सभी ने अपने अपने लेखन कौशल का प्रदर्शन किया।

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इस प्रतियोगिता का मुख्य केन्द्र 'न. मा. जोशी महानगरपालिका विद्यालय' था। उनके द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय भाषा के प्रति गौरव एवं आदर की भावना का सूत्रपात करना अवश्य ही स्वागत योग्य है। 


मातृ भाषा व्यक्तित्व विकास का आधार होता है। भाषा की यह गंगा जितनी निर्मल रहे, विकार से रहित हो, व्यक्तित्व उतना ही निष्पाप तथा ओजस्वी होता चला जाता है। विगत के काल खंडों में देखा गया कि भारतीय समाज में आताताई समाजों के संक्रमण से भाषा भी संक्रमित होता रहा, संक्रमण का यह प्रभाव देववाणी संस्कृत पाली आदि को ऐसे रुग्ण करने लगी कि धीरे धीरे उनका उत्तराधिकार ही मृतप्राय होता चला गया। भाषा की गंगा में वैचारिक दूषण लिए जो बोलियां विकसित हुई, जैसे हिंदी, गुजराती, मराठी, गुरुमुखी बंगाली, उड़िया, मारवाड़ी, राजस्थानी गढ़वाली, आसामी, कास्मीरी एवं द्रविड़ इत्यादि, इनमें पहले जैसी न तो सुचिता रह गयी, न ही पहले जैसा गौरव रहा। 

मध्यकालीन भारत में फ़ारसी को सराहा गया, और उत्तर मध्यकालीन इतिहास में अंग्रेजी को प्रधानता सौंप दी गई। इससे हुआ यह कि हम भारतीय शनैः - शनैः अपना अस्तित्व खोते चले गये। 


भारतीय राजनीति में पिछले ७५ वर्षों की आलोचना करने वालों ने अनेक बार गंगा निर्मली करण के मुद्दा को उठाया और वे आस्था एवं संस्कृति के धरातल पर इस कार्य का महत्व भी बतलाते रहे। आज जब उस दिशा में चिंतन सजग और सक्रिय दिखाई देती है तो मैं सोचता हूं, हमारी मातृभाषा का भी निर्मलीकरण अनिवार्य होना चाहिए। भाषा के संवर्धन का पहला सोपान ही वैचारिक सफाई है। भारतीय बोली भाषा में दूषित विचार और दुर्वादों को स्थान शेष कर देना जरूरी है। 



Thursday, 26 January 2023

आलस का चादर त्याग




सृष्टि का अणु-अणु,कण-कण
आलस का चादर त्याग।
पाञ्चजन्य में प्राण फूँक दी
रणभेरी व बिगुल बज गया
रणचंडी का कंठ पियासा
अब तो जोगी जाग।
सृष्टि का अणु-अणु,कण-कण
आलस का चादर त्याग।।

धर्म न जाने जात-बिरादर
धर्म न जाने भेद।
शक्ति स्वार्थ भूले मर्यादा
आर्य आह! यह खेद।
समरसता का बीज सनातन
खिले पुण्य अनुराग।
सृष्टि का अणु-अणु,कण-कण
आलस का चादर त्याग।

आर्य सुदर्शन आत्मदृष्टि से
अलख लखाने आया।
सृष्टि की मोहक माया में
हरि चेतन भरमाया।
सत्य निरखकर कह दो मन से
रे अभिमानी भाग।
सृष्टि का अणु-अणु,कण-कण
आलस का चादर त्याग।

सुदर्शन आर्यावर्ती....

गणतंत्र दिवस: अमृत महोत्सव


 


छायाचित्र देखने के लिए क्लिक करें

  26/01/2023, ना. मा. वि. दा. मुंबई, नायगांव माध्यमिक विद्यालय, आज 26 जनवरी की प्रात:कालीन स्वर्णिम सूर्य की प्रभा से आलोकित भोइवाड़ा विद्यालय संकुल में आयोजित गणतंत्र दिवस के अवसर पर ध्वाजारोहण किया गया। राष्ट्रगान एवं ध्वजा गीत के बाद रंगारंग कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू हुई। जिसमें विद्यालय के विद्यार्थियों ने दर्शक और प्रस्तोता की सक्रिय एवं उर्जावान उपस्थिति से एक सम्मोहक दृश्य एवं वातावरण निर्मित कर दिया।

सबके मन में गणतंत्र के राष्ट्रीय पर्व के लिए उत्साह देखते ही बन रहा था। 

शुरुवात में विद्यार्थियों ने भाषण से आरंभ किया। विभिन्न भाषाओं में प्रस्तुत भाषण में विद्यार्थियों की वक्तृत्व प्रतिभा देखने और सुनने ही लायक थी। अंग्रेजी भाषा में दिया गया स्पीच दसवीं कक्षा की छात्रा कुमारी सृष्टि तिवारी द्वारा निश्चित ही दर्शनीय एवं श्रवणीय है।

तदंतर विभिन्न माध्यमों एवं कक्षाओं के विद्यार्थियों ने देश भक्ति की भावनारस में डूबी गीतों को अपना स्वर देकर राष्ट्रभक्ति के संकल्प का पतंग आसमान तक पहुंचा दिया। यहां भी हिन्दी माध्यम कक्षा नौवीं ब की छात्रा साहिना खान द्वारा गाया गया गीत श्रवणीय है। 


भाषण एवं गायन के उपरांत नृत्य का भी रंगारंग कार्यक्रम विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत किया गया।

नृत्य एवं गीत के वीडियो देखें


कार्यक्रम का समापन प्रधानाचार्य के संदेश एवं मार्गदर्शन से घोषित किया गया। 

समूचे कार्यक्रम की समयावधि सुबह 8.00 बजे से 11.00 बजे तक मर्यादित रही।


जय हिन्द

जय भारत।

नीचे गणतंत्र दिवस के अवसर खींचें कुछ और छवियाँ देखें।

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