Wednesday, 12 October 2016

मैं





मैं मान का पिंडी
सम्मान का पिंडी।
हुंकार ऐसा हूँ
अभिमान का पिंडी।।

मुझको कहाँ पाया?
जो त्यागने निकला!
मैं शून्य की माया,
तूँ भागने निकला।।

मैं ने उसे पोषा
मैं ने उसे मारा।।
मैं नाम रावण है।
मैं राम हत्यारा।।

योगेश सुदर्शन ..

Monday, 10 October 2016

सुमिरन




एक झोली मे फूल दिया कोई कारण होगा।
एक झोली में काँटें तो कोई कारण होगा ।।

कर्म का कारण होगा,
या
धर्म का कारण होगा।
सोच समझ कर कदम बढ़ाना,
कोई निवारण होगा ।। 

करम खिलाएँ फूल,
कुकर्म उगाएँ काँटं।
धरम खिलाएँ फूल,
अधर्म उगाएँ काँटें।
कर्म खिलाएँ फूल
कर्म का कारण होगा।
अधर्म उगाएँ काँटें 
धरम का कारण होगा।। 

जिसका है वह फूल,
उसी को प्यार से देदो।
मत इतराना भूल,
उसी को प्यार से देदो।
अपने करम का मान 
जो पाया फूल, 
उसी को प्यार से देदो।
वरना होगा शूल,
उसी को प्यार से देदो।

जिसके हैं वे काँटें,
उसी को प्यार से देदो।
तेरा दुख वह बाँटे,
उसी को प्यार से देदो।
अपने करम का मूल,
जो पाया शूल,
उसी को प्यार से देदो।
वर्ना होगा भूल
उसी को प्यार से देदो।