Thursday, 26 January 2023

आलस का चादर त्याग




सृष्टि का अणु-अणु,कण-कण
आलस का चादर त्याग।
पाञ्चजन्य में प्राण फूँक दी
रणभेरी व बिगुल बज गया
रणचंडी का कंठ पियासा
अब तो जोगी जाग।
सृष्टि का अणु-अणु,कण-कण
आलस का चादर त्याग।।

धर्म न जाने जात-बिरादर
धर्म न जाने भेद।
शक्ति स्वार्थ भूले मर्यादा
आर्य आह! यह खेद।
समरसता का बीज सनातन
खिले पुण्य अनुराग।
सृष्टि का अणु-अणु,कण-कण
आलस का चादर त्याग।

आर्य सुदर्शन आत्मदृष्टि से
अलख लखाने आया।
सृष्टि की मोहक माया में
हरि चेतन भरमाया।
सत्य निरखकर कह दो मन से
रे अभिमानी भाग।
सृष्टि का अणु-अणु,कण-कण
आलस का चादर त्याग।

सुदर्शन आर्यावर्ती....

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