पत्र लेखन का विकास एवं विस्तार
मानवीय सभ्यता में दैनिक व्यापार और व्यवहार में पत्र लेखन एक उल्लेखनीय विधा है। समाज एवं सभ्यता के विकास में इस विधा ने अभूतपूर्व विकास करते हुए नये आयाम के शिखर को छुआ है। सूचना, समाचार, कामना आदेश इत्यादि मनोभावों को एक चेतना बिन्दु से दूसरे तक पहुंचाने में यह पत्र पुल या सेतु का कार्य करता रहा है। पत्रकारिता का मुख्य आधार ही पत्र है।
पत्र लेखन का महत्व
पत्र का महत्व आज के आधुनिक जनजीवन में भी रत्ती भर कम नहीं हुआ है बल्कि बढ़ता ही जा रहा है। इसी ने विकसित होते समाज में कभी मुद्रण का रूप लिया फिर आकाशवाणी जैसे ध्वनि माध्यम से दृक-श्रव्य माध्यम तक विस्तृत हुआ। इस प्रगति के विकास का आलम यह है कि अब भी यह अंतर्जाल व्यवस्था में अत्याधुनिक उपकरणों के माध्यम से समाज में पैठ बनाए हुए हैं। इसमें संगणक (कंप्यूटर) से लेकर एंड्रॉयड मोबाइल फोन तक अपने गौरवशाली साम्राज्य का विस्तार कर लिया है।
पत्र के प्रकार
पत्र लेखन में सूक्ष्म विविधता की आलोचना करने पर ज्ञात होता है कि वह मुख्य रूप से अपने दो स्वरूप में प्रगट होता है। एक- अनौपचारिक पत्र, दूसरा औपचारिक पत्र।
औपचार अथवा अनौपचार मूलतः 'आचार' शब्द ग्राम से संबंधित हैं। जिसका आशय है रीति, तरीका, ढंग, तहजीब, या व्यवहार। औपचार माने उप आचार, अर्थात् जहां थोड़े आचरण की सजग अनिवार्यता होती है। किसी उच्च पदस्थ अधिकारी, या किसी प्रतिष्ठित सरकारी गैरसरकारी संस्थान में ऐसी सजगता अपेक्षित होती है। इस तरह के व्यवहार से पोषित पत्र को औपचारिक पत्र कहते हैं।
इसके विपरीत अनौपचारिक पत्र लिखने में आचरण की सजगता अनिवार्य नहीं होती इस तरह के पत्र निर्बाध भाव से मित्रवत् किया जाता है। यह पत्र परिचितों रिश्तेदारों संबंधियों को लिखा जाता है।
औपचारिक पत्र का उदाहरण
पहला उदाहरण : विद्यालय में प्रवेश हेतु आवेदन पत्र।
दिनांक- 8 अप्रैल, 2021
प्रति,
प्रधानाचार्य
राजा शिवाजी विद्यालय,
जामनगर.
विषय: 'प्रवेश हेतु (के लिए) अनुरोध पत्र।'
माननीय प्रधानाचार्य,
मेरा भाई अनमोल पाठक सातवीं कक्षा उत्तीर्ण (पास) होकर आठवीं कक्षा में प्रवेश पाने को इच्छुक हैं। सभी विषयों में उसकी प्रगति उल्लेखनीय है। वह पढ़ने में कुशल और आचरण में अनुशासित विद्यार्थी है।
अतः: महोदय आप अपने विद्यालय में उसे प्रवेश देकर अनुग्रहीत करें।
सादर धन्यवाद।
संलग्न - १- अंक पत्रिका २- स्थानांतरण प्रमाणपत्र ३- आधार परिचय पत्र की छायांकित प्रति
भवदीय,
रौनक पाठक
वरुण सदन,
प्रोफेसर कॉलोनी,
जामनगर.
varun@gmail.com
अनौपचारिक पत्र का उदाहरण
पहला उदाहरण
वक्तृत्व प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पाने के उपलक्ष्य में आपके मित्र / सहेली ने आपको बधाई पत्र भेजा है उसे धन्यवाद देते हुए पत्र का प्रारूप तैयार कीजिए .
21 जुलाई, 2020
प्रिय मित्र श्री रमेश कुमार जी,
सादर नमस्कार,
मित्र हम सपरिवार स्वस्थ और सकुशल हैं साथ ही साथ ईश्वर से कामना करते हैं कि आप भी सपरिवार स्वस्थ और कुशल होंगे. रमेश मुझे तुम्हारा लिखा हुआ शुभकामना पत्र मिला। उसे पढ़कर मेरा ह्रदय बहुत आनंदित और प्रसन्न हुआ। मुझे प्रसन्नता देने वाले मित्र का मैं ह्रदय से बहुत आभारी हूं.
आपके पत्र से मुझे और उत्तम वक्ता होने की प्रेरणा मिलती है. आगे से अन्य किसी अवसर पर मैं प्रयत्न करूंगा कि अपने भाव और विचार को अधिक प्रभावशाली ढंग से रख सकूँ. एक बार फिर से तुम्हारा बहुत बहुत धन्यवाद।
दोस्त है तो जिंदगी में जान है।
यह दोस्ती ही जिंदगी की शान है॥
क्या है दौलत, क्या है शोहरत यार सुन,
दोस्ती पर जान भी कुर्बान है।
तुम्हारा,
रूपेश कुमार
रूम नंबर २४०,
आजाद नगर,
नेताजी सुभाषचंद्र चंद्र मार्ग
कोलकात्ता,
ruprsh369@gmail.com
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