Home

Friday, 16 December 2016

इस दंतुरित मुस्कान में


इस दंतुरित मुस्कान में

दन्तुरित मुस्कान

दन्तुरित मुस्कान में 
अस्तित्व का आभाष देखो !


मंदिरों में मस्ज़िदों में 
नित भटकते जीव ।
दुख उठाते झेलते 
संताप अमृत पीव ।
घर में है वह घट सुनहला 
सुधा सरस निज पास देखो 
दन्तुरित मुस्कान में
अस्तित्व का आभाष देखो॥


हैं अभी निष्पाप इनके 
चारू चंचल नैन ।
हे वेद विद ले ज्ञान इनका 
बूझ मीठे बैन ।
अति गूढ इस गुरु की गिरा में 
आनंद का उल्हास देखो
दन्तुरित मुस्कान में 
अस्तित्व का आभाष देखो॥ 


d dh

Monday, 14 November 2016

तव वत्सः जननि वसुधे...


धारक पालक पोषक धरती
तुझ पर जन्मे हम तेरे है।
कुछ अभिमानी मूढ पुत्र ने
मूल-मूल माला फेरे हैं ।।

इतना मेरा उतना तेरा
अंग तेरा बाँटे पापी।
वे माँ की पीड़ा क्या जाने?
ममता के अंतर घाती।

भरत नहीं हो पाते हैं वो
कर्महीन अधिकार चाहिए
आरक्षित व्यवहार चाहिए
राम नहीं आदर्श दशानन
ऐसे धर्म चक्र छलते हैं
निजहित की भजिया तलते हैं।

कटे अंग की पीड़ा समझो
जड़ मूढ़ता त्यागो भाई।
अपंगत्व की टीस सुनो
क्यों बिलख रही धरती माई।।

बुद्ध की मोहन-माया विद्या
वक्र कलंकित होगा।
यदि न अब तुम जगे
धर्म का चक्र कलंकित होगा।।

योगेश सुदर्शन मिश्र 

Wednesday, 12 October 2016

मैं





मैं मान का पिंडी
सम्मान का पिंडी।
हुंकार ऐसा हूँ
अभिमान का पिंडी।।

मुझको कहाँ पाया?
जो त्यागने निकला!
मैं शून्य की माया,
तूँ भागने निकला।।

मैं ने उसे पोषा
मैं ने उसे मारा।।
मैं नाम रावण है।
मैं राम हत्यारा।।

योगेश सुदर्शन ..

Monday, 10 October 2016

सुमिरन




एक झोली मे फूल दिया कोई कारण होगा।
एक झोली में काँटें तो कोई कारण होगा ।।

कर्म का कारण होगा,
या
धर्म का कारण होगा।
सोच समझ कर कदम बढ़ाना,
कोई निवारण होगा ।। 

करम खिलाएँ फूल,
कुकर्म उगाएँ काँटं।
धरम खिलाएँ फूल,
अधर्म उगाएँ काँटें।
कर्म खिलाएँ फूल
कर्म का कारण होगा।
अधर्म उगाएँ काँटें 
धरम का कारण होगा।। 

जिसका है वह फूल,
उसी को प्यार से देदो।
मत इतराना भूल,
उसी को प्यार से देदो।
अपने करम का मान 
जो पाया फूल, 
उसी को प्यार से देदो।
वरना होगा शूल,
उसी को प्यार से देदो।

जिसके हैं वे काँटें,
उसी को प्यार से देदो।
तेरा दुख वह बाँटे,
उसी को प्यार से देदो।
अपने करम का मूल,
जो पाया शूल,
उसी को प्यार से देदो।
वर्ना होगा भूल
उसी को प्यार से देदो।