Home

Friday, 16 December 2016

इस दंतुरित मुस्कान में


इस दंतुरित मुस्कान में

दन्तुरित मुस्कान

दन्तुरित मुस्कान में 
अस्तित्व का आभाष देखो !


मंदिरों में मस्ज़िदों में 
नित भटकते जीव ।
दुख उठाते झेलते 
संताप अमृत पीव ।
घर में है वह घट सुनहला 
सुधा सरस निज पास देखो 
दन्तुरित मुस्कान में
अस्तित्व का आभाष देखो॥


हैं अभी निष्पाप इनके 
चारू चंचल नैन ।
हे वेद विद ले ज्ञान इनका 
बूझ मीठे बैन ।
अति गूढ इस गुरु की गिरा में 
आनंद का उल्हास देखो
दन्तुरित मुस्कान में 
अस्तित्व का आभाष देखो॥ 


d dh

No comments:

Post a Comment

मनोगत प्रगट करें