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काव्य-कलश
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Wednesday, 12 October 2016
मैं
मैं मान का पिंडी
सम्मान का पिंडी।
हुंकार ऐसा हूँ
अभिमान का पिंडी।।
मुझको कहाँ पाया?
जो त्यागने निकला!
मैं शून्य की माया,
तूँ भागने निकला।।
मैं ने उसे पोषा
मैं ने उसे मारा।।
मैं नाम रावण है।
मैं राम हत्यारा।।
योगेश सुदर्शन ..
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