अच्छे दिनों का भारत
आज-कल भारत में अच्छे दिन चल रहे हैं। जहां भी देखो वहां सुख है, समृद्धि है, संतोष है। चारो ओर देश तीव्र गति से विकास कर रहा है। विपक्षी दल में सुमति और सुसंगति है। कोई महत्व की स्पर्धा नहीं, सब नैतिकता के प्रति समर्पित हैं, सभी कर्म परायण और धर्म परायण हो चलें हैं। ऐसे तो कलियुग पहले से ही अपने सौंदर्य के सम्मोहन से सबको वशीभूत किये इठला और इतरा रहा है।
देखो न, यहां राजनीति में रामराज्य हैं, शासन में सुशासन शिक्षा में मुक्ति के पंख समाज स्वयं अपने शब्दार्थ से सार्थक होता है। क्या आपने कभी देखा था ऐसा अच्छा दिन? रहने दो कुछ मत कहो, नज़र लग जायेगी। इस नवजात काल पुरुष की, इस अच्छे दिन की बलैया लो, दुनिया इसे दिठियाने को तैयार हैं।
इन्हीं दिनों देखो, केशव प्रसाद मौर्या रामचरित मानस की तारीफ करते नहीं अघाते। लोग आस्था के वैकुंठ सागर में आकंठ डूब उतरा रहे हैं। समाजिक सद्भाव की सेतु पर भारतीय सभ्यता अपनी छाती चौड़ी किये इतराता चल रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विद्वानों की खोपड़ी में साक्षात मां शारदा अपनी वीणा के सप्त सुरों की रागिनी छेड़ रहीं हैं। मोहन भागवत साक्षात बाबा तुलसीदास का अवतार ही ग्रहण किए संसार के अज्ञानियों को अपनी बुद्धि की प्रतिमा से, मोक्षदायिनी ज्ञान से धन्य धन्य कर रहे हैं। बताओ देखा था कभी इतना अच्छा दिन?
इस देश में ब्राह्मण द्रविड़ हो चलें हैं। क्षत्रियों ने ऐसा छत्र विस्तार किया की हर एक वीर धीर और स्वास्थ हैं। वैश्य जैसे दानी समुदाय संसार का ध्यान अपनी ओर खींच रहें हैं। शूद्र को सभी ताड़ना जान गये। इस प्रकार अच्छे दिन की प्रगति देखने ही लायक है। संसार के महानतम पर्यटकों ने भारत में अपना डेरा जमा लिया है, और इसके गौरव की संस्कृतियां और स्तुतियां लिखी जा रहीं हैं।
इस राष्ट्र के निवासियों का चारित्रिक उत्थान इतना गरिमामय मय हो चला है कि जहां भी दृष्टि उठाओ, काम को भस्म करते शिव दिखाई देते हैं, भरत जैसे त्यागी तपोनिधि, राम जैसे आदर्श गली गली मुहल्ले मुहल्ले मिल जाते हैं। यहां ईश्वरीय अनुकंपा रात दिन बरसती है। अब किसी की मजाल नहीं कि कोई रावण बजार से सुंदर सुशील लक्ष्मी का हरण कर सके! कोई सफाई कर्मचारी लक्ष्मी के चरित्र को लांक्षित करें, अब कोई ऐसी परिस्थिति नहीं कि राम और लव कुश आपस में ही लड़ पड़े और धन क्षुब्ध होकर अपनी माता से गुहार करे कि "हे माता, तूं मुझे अपनी कोख में अब छिपा ले यह संसार मेरे रहने लायक नहीं।"
इन दिनों, पवन, वरूण, अग्नि, मरुत, रूद्र, अश्विनी, वनस्पति, आदि सभी देव और उनके पार्षद द्रव्य सुखी और समृद्ध हैं। अगर यह अच्छा दिन नहीं है तो और क्या है?

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