मैं अमर हूं मुझको तुम अमृत समझना। मुझको पीना चाहते जीवन के भोगी, मुझको चख कर काल चलता झूमकर, | योगेश सुदर्शन मिश्र१९ मई जौनपुर उ.प्र. |
मैं यहीं था किन्तु देखा ये गया की नहीं था, एक ही घट में भरा उतना नहीं हूं, हाँ कई घट बन रहे हैं फूटने को, लोग जब कह दें तुझे कि मैं मरा हूं, |
योगेश सुदर्शन मिश्र
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