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Wednesday, 8 March 2023

मैं अमर हूं...

मैं अमर हूं मुझको तुम अमृत समझना।

मुझको पीना चाहते जीवन के भोगी, 
और हैं गंभीर जो विस्मित समझना। 

मुझको चख कर काल चलता झूमकर,
इस निरंतर का कहाँ है यति समझना। 

        योगेश सुदर्शन मिश्र
१९ मई 
जौनपुर उ.प्र.

मैं यहीं था किन्तु देखा ये गया की नहीं था,
दृष्टि हूं मैं दृश्य को तुम मित समझना।

एक ही घट में भरा उतना नहीं हूं,
पात्र अगणित मुझमें मत सीमित समझना। 

हाँ कई घट बन रहे हैं फूटने को, 
श्रृंखला यह हैं नहीं परिमित समझना।

लोग जब कह दें तुझे कि मैं मरा हूं, 
तुम हृदय निज देखकर जीवित समझना। 

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