दीपों की माला पहनाकर
अमा यामिनी का स्वागत हो,
इसने मान हरण कर लिया
सूर्य चंद्र प्रदीप्त भाव का।
जग को दिखला देती है यह
अनंत सृष्टि में अगणित तारे,
सभी सूर्य हैं, सभी सहोदर
सब से ही संबंध हमारे।
एक सूर्य के एक राम का सूत्र
सभी को बाँध रहा है
एक एक प्रत्येक किन्तु कण
शून्य सिन्धु को साध रहा है।
आओ ऐसा आराधन हो
हो या ना कोई साधन हो
माया को मोहित कर लें हम
चलो शून्य का अभिवादन हो।
दीपक के जीवन की पूँजी
तपकर ज्योतिर्मय हो जाना
आओ हम दीपक हो जाये,
दीपावली त्योहार मनाए।
योगेश सुदर्शन आर्यावर्ती
अमा यामिनी का स्वागत हो,
इसने मान हरण कर लिया
सूर्य चंद्र प्रदीप्त भाव का।
जग को दिखला देती है यह
अनंत सृष्टि में अगणित तारे,
सभी सूर्य हैं, सभी सहोदर
सब से ही संबंध हमारे।
एक सूर्य के एक राम का सूत्र
सभी को बाँध रहा है
एक एक प्रत्येक किन्तु कण
शून्य सिन्धु को साध रहा है।
आओ ऐसा आराधन हो
हो या ना कोई साधन हो
माया को मोहित कर लें हम
चलो शून्य का अभिवादन हो।
दीपक के जीवन की पूँजी
तपकर ज्योतिर्मय हो जाना
आओ हम दीपक हो जाये,
दीपावली त्योहार मनाए।
योगेश सुदर्शन आर्यावर्ती